सोना $5,590 तक गया—फिर अचानक गिरा: रोज़ इतनी तेज़ उथल-पुथल क्यों?

By Admins Updated 3 February 2026

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हाल ही में सोने के बाजार में बेहद तीव्र उतार-चढ़ाव देखने को मिला: कीमतें तेजी से $5,590 प्रति औंस के आसपास पहुंचीं, फिर बहुत जल्दी तेज़ गिरावट आई—और उसके बाद भी हर दिन जोरदार ऊपर-नीचे झूले। यह स्थिति आमतौर पर किसी एक खबर से नहीं बनती, बल्कि तब बनती है जब तीन ताकतें एक साथ टकराती हैं: भारी प्रॉफिट-बुकिंग, ब्याज दर/डॉलर की उम्मीदों में बदलाव, और लेवरेज्ड पोज़िशन का मजबूरन घटाया जाना (De-leveraging)

हुआ क्या?

जब सोना तेज़ी से बढ़कर $5,590 के क्षेत्र में गया, बाजार अचानक पलट गया:

  • कई ट्रेडरों ने बढ़त के बाद मुनाफा बुक किया,

  • कीमतें महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के नीचे फिसलीं,

  • स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए,

  • और तेज़ वोलैटिलिटी में लेवरेज वाले पोज़िशन लिक्विडेट होने लगे।

नतीजा: एक तेज़ गिरावट, फिर बाजार “व्हिपसॉ” (Whipsaw) मोड में चला गया—जहां इंट्राडे रेंज बड़ी होती है और रिवर्सल बार-बार होते हैं।

रिकॉर्ड हाई के बाद इतनी तेज़ गिरावट क्यों आई?

1) ‘वर्टिकल रैली’ के बाद प्रॉफिट-बुकिंग

जब कीमत बहुत तेजी से और बहुत ऊपर चली जाती है, बाजार “नाज़ुक” हो जाता है। फिर एक छोटा सा दबाव भी चेन रिएक्शन बना सकता है:

  • शुरुआती बिक्री,

  • सपोर्ट टूटना,

  • स्टॉप-लॉस हिट होना,

  • और फिर और ज्यादा सेलिंग।

सरल शब्दों में: जितनी तेज़ चढ़ाई, उतना ही तेज़ फिसलने का जोखिम

2) डॉलर और ब्याज-दर की उम्मीदें पल भर में सेंटीमेंट बदल देती हैं

सोना अमेरिकी डॉलर और Federal Reserve की नीति-उम्मीदों के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। यदि बाजार को लगे कि ब्याज दरें ज्यादा समय तक ऊंची रह सकती हैं, या डॉलर अचानक मजबूत हो जाए, तो सोने पर दबाव बढ़ता है।

हाल के बाजार-चर्चा में Kevin Warsh के नाम और Donald Trump से जुड़े राजनीतिक कारकों का भी जिक्र हुआ, जिससे “रिस्क-ऑन/रिस्क-ऑफ” मूड तेजी से बदलता है और मेटल्स में चालें बढ़ सकती हैं।

3) De-leveraging: जब लेवरेज उतरता है, मूवमेंट बढ़ जाता है

सोने की शॉर्ट-टर्म चाल में फ्यूचर्स/डेरिवेटिव्स का बड़ा रोल होता है। जब वोलैटिलिटी बढ़ती है:

  • रिस्क मैनेजमेंट सख्त हो सकता है,

  • मार्जिन (Margin) की जरूरत बढ़ सकती है,

  • और लेवरेज्ड ट्रेडरों को पोज़िशन घटानी पड़ सकती है।

इससे सामान्य करेक्शन भी “लिक्विडेशन कैस्केड” बन सकता है—खासकर उन बाजारों में जो CME Group जैसे एक्सचेंज-इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हों।

रोज़ाना उतार-चढ़ाव इतना हिंसक क्यों है?

क्योंकि बाजार में इस समय दो मजबूत नैरेटिव एक साथ चल रहे हैं:

  • बुलिश नैरेटिव: अनिश्चितता और मैक्रो-रिस्क के बीच सोना अभी भी कई निवेशकों के लिए “हेज” है।

  • बेयरिश/टेक्निकल नैरेटिव: पोज़िशनिंग बहुत भीड़भाड़ वाली हो चुकी है, मुनाफा बहुत जमा है, इसलिए थोड़ी सी कमजोरी पर भी स्टॉप/लिक्विडेशन तेजी से बढ़ सकता है।

जब दोनों पक्ष जोर से खींचते हैं, तो “Whipsaw” मोड बनता है—एक दिन तेज़ उछाल, अगले दिन अचानक गिरावट, और दैनिक रेंज असामान्य रूप से बड़ी

ऐसे बाजार में क्या देखना चाहिए?

अगर यह वोलैटिलिटी जारी रहती है, इन चीज़ों पर नजर रखें:

  1. USD की दिशा (खासतौर पर अचानक स्पाइक)

  2. ब्याज-दर की उम्मीदें (Fed टोन, बॉन्ड यील्ड्स, बड़े डेटा सरप्राइज)

  3. फोर्स्ड सेलिंग के संकेत (गैप मूव, तेजी से सपोर्ट टूटना, volatility burst)

और इस माहौल में जोखिम प्रबंधन सबसे जरूरी है:

  • लेवरेज कम रखें,

  • पोज़िशन साइज घटाएं,

  • बड़े दैनिक उतार-चढ़ाव को स्वीकार करें,

  • तेज़ मूव में slippage की तैयारी रखें।